नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय दुर्ग में छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य एवं आहार्य (वेशभूषा) विषय पर दो दिवसीय कौशल उन्नयन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ऋचा ठाकुर मैडम के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है तथा इसमें लोक संगीत विभाग की मैडम का पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, नृत्य शैलियों और पारंपरिक वेशभूषा से परिचित कराना है।
कार्यशाला के पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ. ऋचा ठाकुर मैडम एवं विशेषज्ञ रोशनी वर्मा के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर की गई, जिसके साथ ही कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात मां सरस्वती वंदना एवं वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत के गायन से वातावरण सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक हो गया।
प्रथम सत्र में विद्यार्थियों को सुआ नृत्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसमें महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण एवं उनके सांस्कृतिक महत्व को समझाया गया। इसके साथ ही राउत नाचा के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसमें पुरुषों की वेशभूषा—जैसे धोती, साफा (पगड़ी), तथा उनके द्वारा पहने जाने वाले गहनों और उनके महत्व पर प्रकाश डाला गया। साथ ही नृत्य के दौरान उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक उपकरणों के बारे में भी बताया गया।
यह कार्यशाला छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं परंपराओं को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निधि वर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर समस्त अध्यापकगण एवं कार्यालय प्रमुख उपस्थित रहे। साथ ही सरल साहू, वत्सल तिवारी, राजेंद्र कुमार, एवं कार्यालय प्रमुख श्री यशवंत कुमार साहू सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और रुचि के साथ सहभागिता की, जिससे कार्यशाला का प्रथम दिन अत्यंत सफल एवं प्रभावशाली रहा। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हो रहा है।